DM का सख्त आदेश: प्रतिबंधित धान की नर्सरी होंगी नष्ट,सिर्फ पात्र किसानों को मिलेगी छूट

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रुद्रपुर न्यूज़। (राजतंत्र टाइम्स) ऊधम सिंह नगर में पिछले साल 23 जुलाई को ग्रीष्मकालीन धान की
नर्सरी तैयार करने एवं रोपाई करने पर जो रोक का आदेश जारी हुआ था,वह अनवरत रूप से जारी रहेगा।आदेश का पालन करने के लिए ग्रीष्मकालीन धान की अनाधिकृत रूप से तैयार नर्सरी को नष्ट करने की समिति गठित की गई है।जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने आज आदेश जारी कर कृषि विभाग सहित जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ग्रीष्मकालीन धान की अनाधिकृत तैयार की जा रही नर्सरियों को प्राथमिकता के आधार पर नष्ट कराना सुनिश्चित करें।इसके अतिरिक्त ऐसे स्थल / खेत जहां पर जल भराव के कारण मक्का उगाया जाना संभव नही है, उन क्षेत्रों के लिए
निम्न प्रक्रिया अपना कर ग्रीष्मकालीन धान की नर्सरी तैयार करने एवं रोपाई करने की अनुमति आप अपने स्तर से दे सकते हैं। आदेश में जिक्र है कि
जलभराव वाले क्षेत्र के कृषक कृषि विभाग के विकासखण्ड / न्यायपंचायत स्तरीय कार्यालय तथा राजस्व विभाग के राजस्व उपनिरीक्षक,तहसील में आवेदन पत्र जमा कर सकता है। पत्र हस्तलिखित अथवा टाइप किया हुआ किसी भी तरह का हो सकता है,लेकिन उसके साथ भूमि का विवरण संलग्न करना होगा।प्राप्त सभी आवेदन पत्रों का कृषि विभाग (विकासखण्ड प्रभारी / न्यायपंचायत प्रभारी) एवं राजस्व विभाग ( राजस्व उपनिरीक्षक) के कर्मचारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर आख्या एक सप्ताह में प्रस्तुत की जाएगी।प्रकरण उपयुक्त होने पर अनुमति सम्बन्धित उपजिलाधिकारी कार्यलय से निर्गत की जाएगी और स्थलीय जांच में अनुउपयुक्त पाए गए आवेदन पत्रों को निरस्त कर सम्बन्धित कृषक को लिखित में अवगत कराया जाएगा।उपरोक्त प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखा जाए कि पात्र किसानों (ऐसे स्थल/खेत जहां पर जल भराव के कारण मक्का उगाया
जाना संभव नही है। सिर्फ धान की खेती ही की जा सकती है।) को कोई असुविधा न हो और अपात्र किसानों (ऐसे स्थल / खेत जहां पर ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का उगाया जाना संभव है।) को इस का लाभ न मिल सके।सामूहिक रूप से पूरे गांव या पूरे क्षेत्र को अनुमति जारी नहीं की जाएगी।
डीएम ने निर्देशों का कड़ाई से पालन कर कार्रवाई करने को कहा है।इस आदेश को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है कि मक्का का वाजिब दाम नहीं मिल पाया था।इससे किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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