- बादलों की गोद में बसा भैरवगढ़ी मंदिर, आस्था के साथ एडवेंचर का नया ठिकाना
- 2400 मीटर ऊंचाई पर दिव्य धाम, भैरवगढ़ी मंदिर बना टूरिस्ट हॉटस्पॉट
- बादलों के बीच ‘काल भैरव’ का धाम, ट्रैकिंग लवर्स की पहली पसंद बन रहा भैरवगढ़ी मंदिर
पौड़ी गढ़वाल। (राजतंत्र टाइम्स)भैरवगढ़ी मंदिर कीर्तिखाल गांव की ऊंची पहाड़ियों में स्थित भैरवगढ़ी मंदिर इन दिनों अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं व पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। लैंसडाउन के निकट समुद्र तल से लगभग 2400 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर चारों ओर से पहाड़ों और बादलों से घिरा हुआ है, जो इसे बेहद मनमोहक बनाता है।
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भैरवगढ़ी मंदिर की यह तस्वीर इसकी ऊंचाई और प्राकृतिक खूबसूरती को दर्शाती है, जहाँ मंदिर बादलों के बीच स्थित दिखाई दे रहा है और आसपास की घाटियों का विहंगम दृश्य मन को मोह लेता है।
मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 2 से 2.5 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है, जो घने जंगलों और हरियाली से होकर गुजरता है। यही कारण है कि यह स्थान ट्रैकिंग प्रेमियों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
यह मंदिर भगवान शिव के 14वें अवतार काल भैरव को समर्पित है, जिन्हें गढ़वाल क्षेत्र का रक्षक देवता माना जाता है। यहां नियमित पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालु मंडुवा (बाजरे के आटे) का प्रसाद चढ़ाते हैं, जिसे विशेष महत्व दिया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान यह स्थल और भी अधिक आकर्षक हो जाता है, जब चारों ओर बादल, हरियाली और हिमालय की चोटियों का दृश्य एक अलग ही अनुभूति कराता है।
आस्था, रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम प्रस्तुत करता भैरवगढ़ी मंदिर अब क्षेत्र में पर्यटन की नई संभावनाओं को भी जन्म दे रहा है।

