उत्तराखंड के चंपावत में बापरू गांव की 5 महिलाओं ने हिलान्स कैफे के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।
चंपावत।(राजतंत्र टाइम्स)“आतिथ्य” और आत्मनिर्भरता की जीवंत मिसाल बन चुका बापरू गांव आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व एवं राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध नीतियों के परिणामस्वरूप यहां की ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि सामाजिक रूप से भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।जनपद चम्पावत के दूरस्थ ग्राम बापरू में स्थापित ‘हिलान्स कैफे’ आज केवल एक व्यावसायिक इकाई नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग का उत्कृष्ट मॉडल बनकर सामने आया है।इस कैफे का संचालन ‘जय भगवती मां स्वयं सहायता समूह’ की पांच परिश्रमी एवं दूरदर्शी महिलाएं कर रही हैं। जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने संकल्प, श्रम और नवाचार से एक नई दिशा स्थापित की है।समूह की अध्यक्ष श्रीमती राखी फर्त्याल के नेतृत्व में इन महिलाओं ने पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार की मांग से जोड़ते हुए अनेक स्थानीय उत्पादों को एक नई पहचान दी है। पिरूल (चीड़ की पत्तियों) से निर्मित आकर्षक एवं पर्यावरण अनुकूल टोकरियां, आंवला कैंडी, विभिन्न प्रकार के घर पर बने अचार, जूट बैग तथा मंडुवे (रागी) के पौष्टिक बिस्किट जैसे उत्पाद न केवल स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हो रहे हैं, बल्कि बाहरी बाजारों में भी अपनी गुणवत्ता और विशिष्टता के कारण पहचान बना रहे हैं।हिलान्स कैफे में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यहाँ की पारंपरिक स्वाद और “आतिथ्य” का अनूठा अनुभव मिलता है। स्थानीय व्यंजनों को स्वच्छता और गुणवत्ता के साथ परोसते हुए यह कैफे क्षेत्रीय संस्कृति को भी संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। इस पहल ने यह भी सिद्ध किया है कि यदि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का सही उपयोग किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्र भी आर्थिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र बन सकते हैं।आर्थिक दृष्टि से भी यह पहल अत्यंत सफल सिद्ध हो रही है। जिस स्वयं सहायता समूह ने कभी छोटे स्तर पर अपनी शुरुआत की थी, वह आज हिलान्स कैफे एवं अपने उत्पादों के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर रहा है। यह आय न केवल इन महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार ला रही है।अब ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिए गए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे महिलाओं को व्यवसाय संचालन, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन जैसे विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त हुई, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ अपने उद्यम को आगे बढ़ा रही हैं।

