कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत का तहसील व निबंधन कार्यालय पर औचक निरीक्षण

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  • 20 साल पुराने राजस्व वादों पर जताई नाराजगी, लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश

नैनीताल। (राजतंत्र टाइम्स) कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने सोमवार को नैनीताल स्थित उपजिलाधिकारी कार्यालय, तहसील कार्यालय तथा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय का औचक निरीक्षण कर राजस्व वादों, अभिलेखों के रखरखाव और कार्यालयीय कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर आयुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने धारा 229-बी के अंतर्गत लंबित राजस्व वादों की समीक्षा की। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई मामले पिछले 15 से 20 वर्षों से लंबित पड़े हैं। इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने उपजिलाधिकारी को निर्देश दिए कि पुराने मामलों में अनावश्यक लंबी तिथियां देने की प्रवृत्ति समाप्त की जाए और प्रत्येक सप्ताह अथवा तीन-तीन दिन के अंतराल में सुनवाई कर मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

धारा 176 से संबंधित संपत्ति बंटवारे के मामलों की समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि कई मामलों में उपजिलाधिकारी द्वारा आदेश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित पटवारियों ने ‘कुर्रे’ दाखिल नहीं किए। इस पर आयुक्त ने संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा आवश्यकतानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कुमाऊं आयुक्त ने धारा 143 के अंतर्गत भूमि को अकृषक घोषित किए जाने से संबंधित लंबित आवेदनों और उनके निस्तारण की भी समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान राजस्व अहलमद रोहित पालीवाल द्वारा मामलों की समुचित जानकारी न रखे जाने, पत्रावलियों और अभिलेखों का व्यवस्थित रखरखाव न करने तथा कार्यों में लापरवाही बरतने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। आयुक्त ने उपजिलाधिकारी नैनीताल को संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए।

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कई राजस्व निरीक्षक एवं उप निरीक्षक समय पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस पर आयुक्त ने ऐसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनके विरुद्ध भी प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के निर्देश दिए।

आयुक्त ने सम्मन तामिली पंजिका, इश्तहार पंजिका और विभिन्न राजस्व अभिलेखों का अवलोकन करते हुए कार्यों की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार को निर्देश दिए कि तहसील क्षेत्र के सभी राजस्व निरीक्षकों और उप निरीक्षकों की बैठक बुलाकर धारा 143 से संबंधित लंबित प्रकरणों का उसी दिन निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक लंबित मामलों पर कार्रवाई पूरी न हो जाए, तब तक कार्यालय खुला रखा जाए और अद्यतन रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराई जाए।

आयुक्त ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने न्यायालयों में लंबित वादों को आरसीएमएस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश भी दिए।

इसके बाद आयुक्त ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रजिस्ट्री दस्तावेजों और अभिलेखों के रखरखाव में गंभीर खामियां पाई गईं। जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद क्रेताओं को दस्तावेज देने के लिए रिसीविंग पंजिका उपलब्ध नहीं थी तथा कई रजिस्ट्रियों का विवरण मौके पर नहीं मिला। इस पर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सब-रजिस्ट्रार से स्पष्टीकरण तलब किया और भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही न होने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सौरभ असवाल, प्रशिक्षु आईएएस दिव्यांशु मीणा, तहसीलदार अक्षत कुमार भट्ट सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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