पंतनगर। (राजतंत्र टाइम्स) गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के संबंध में एक बैठक का आयोजन कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में अधिष्ठाता डॉ. सुभाष चन्द्र, निदेशक अनुसंधान डॉ. एस.के. वर्मा, निदेशक संचार डॉ. जे.पी. जायसवाल सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में जानकारी दी गई कि भारत सरकार द्वारा किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती, धारण क्षम्य खेती तथा सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 1 जून से 30 जून तक एक माह का ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है।
विश्वविद्यालय अपने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), वैज्ञानिकों एवं प्रसार तंत्र के माध्यम से इस अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करेगा। इसके अंतर्गत रुद्रपुर, गदरपुर तथा खटीमा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम, किसान गोष्ठियां, ग्राम स्तरीय अभियान तथा हितधारक संवाद आयोजित किए जाएंगे। अभियान में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों, उर्वरक एवं कृषि आदान विक्रेताओं तथा प्रगतिशील किसानों की भी सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में कुलपति ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मृदा स्वास्थ्य एवं कृषि उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम), समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम), जैविक नियंत्रण उपायों तथा प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही विभिन्न फसलों के लिए उर्वरकों की उचित मात्रा एवं प्रकार निर्धारित करने में मृदा स्वास्थ्य कार्ड की महत्ता पर विशेष बल दिया गया।
कुलपति डॉ. कश्यप ने कहा कि मिट्टी एक जीवंत प्राकृतिक संसाधन है और इसका संरक्षण सतत कृषि के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों के कार्मिकों तथा प्रसार कार्यकर्ताओं से प्रत्येक गांव तक पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने हेतु बहुस्तरीय जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अभियान के दौरान किसानों को मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, जल संरक्षण तथा सतत कृषि प्रणालियों के बारे में जागरूक किया जाएगा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक पूरे अभियान काल में क्षेत्रीय प्रदर्शन, प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं किसान संवाद आयोजित कर दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य एवं कृषि स्थिरता को बढ़ावा देंगे।
बैठक का समापन सभी संबंधित पक्षों द्वारा ‘खेत बचाओ अभियान’ को सफल बनाने तथा किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।



