विदेश भेजने के नाम पर गुलामी! दुबई में फंसे चार युवक, पासपोर्ट जब्त, जान का खतरा,उत्तराखंड पुलिस से लगाई गुहार!

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वीडियो वायरल होते ही एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने लिया संज्ञान, एजेंटों की तलाश शुरू

दुबई से ऊधम सिंह नगर पुलिस से लगाई बचाने की गुहार

रुद्रपुर न्यूज।उत्तराखंड समाचार
(Rajtantra Times) दुबई में रोजगार के नाम पर चार लोगों को बंधक बनाने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ तो ऊधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा सक्रिय हो गए। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच बैठा दी।साथ ही इन युवकों को दुबई भेजने वाले एजेंटों की भी तलाश शुरू हो गई है।इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है।इसने चार युवक नजर आ रहे हैं।जिन्होंने अपना नाम भुड़िया खटीमा निवासी जुगेश पुत्र गौरी शंकर, चंदेली खटीमा निवासी लल्लन प्रसाद पुत्र वकील प्रसाद, रूस्तमपुर खजूरिया रामपुर निवासी विशाल शर्मा पुत्र रमन शर्मा और खजूरिया रामपुर निवासी रंजीत सिंह पुत्र कुलविंदर सिंह बता रहे हैं।रोते हुए युवक अपनी पीड़ा बताते हुए कह रहे हैं कि उन्हें कुछ सप्ताह पहले खटीमा और रुद्रपुर निवासी दो एजेंटो ने दुबई में पानी की पैकिंग के नाम पर भेजा। इसके एवज में उनसे अच्छी खासी रकम ऐंठ ली गई। जब वह दुबई पहुंचे तो एजेंट ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और उन्हें ज्यादा गर्मी वाले स्थान पर काम करने के लिए भेज दिया गया है। माना करने पर उन्हें धमकी दी गई। यह भी आरोप लगा रहे हैं कि अब उन्हें बंधक बना लिया गया है।जब यह वीडियो एसएसपी मणिकांत मिश्रा तक भी पहुंचा तो उन्होंने तत्काल खटीमा कोतवाली पुलिस को जांच के निर्देश दिए। साथ ही उत्तर प्रदेश के रामपुर पुलिस को भी मामले से अवगत कराया। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि पीड़ितों के स्वजन से संपर्क किया जा रहा है, साथ ही यह। ही पता लगाया जा रहा है कि उन्हें दुबई भेजने वाले एजेंट कौन थे। एजेंट पर कार्रवाई करने के साथ पीड़ितों को भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बड़ा सवाल: कब टूटेगा विदेश भेजने के नाम पर ठगी का यह नेटवर्क?

यह कोई पहला मामला नहीं है। ऊधम सिंह नगर समेत पूरे प्रदेश में आए दिन ऐसे प्रकरण सामने आ रहे हैं, जहां बेरोजगार युवाओं को विदेश में सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर एजेंट लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं। हकीकत सामने आती है तब, जब युवक किसी विदेशी जमीन पर फंस जाता है—कभी बंधक बनकर, कभी अमानवीय हालात में काम करने को मजबूर होकर।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें से अधिकांश एजेंट बिना किसी पंजीकरण, लाइसेंस और सरकारी निगरानी के खुलेआम काम कर रहे हैं। पुलिस कार्रवाई अक्सर शिकायत के बाद ही हरकत में आती है, जबकि ठगी का नेटवर्क पहले से सक्रिय रहता है। नतीजा—एक मामला दर्ज होता है, कुछ सुर्खियां बनती हैं और फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।

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