पंतनगर विश्वविद्यालय में योग और शौर्य का महापर्व: अश्वारोही कैडेटों के अद्भुत प्रदर्शन ने मोहा मन

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पंतनगर।(राजतंत्र टाइम्स)। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन उत्साह, अनुशासन एवं जनभागीदारी के साथ किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिष्ठाताओं, निदेशकों, संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर योगाभ्यास किया। इस अवसर पर विष्वविद्यालय की प्रथम महिला श्रीमती रेनू कश्यप के नेतृत्व में लेडीज़ क्लब की सदस्याओं ने भी योग दिवस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अपने संबोधन में कुलपति डा. कश्यप ने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वय का माध्यम है। उन्होंने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति को संतुलित, स्वस्थ और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देती है। योग के माध्यम से चित्त की वृत्तियों का निरोध होता है तथा व्यक्ति मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त करता है। उन्होंने सभी से नियमित रूप से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सर्वाधिक आकर्षक एवं चर्चित केंद्र विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेटों द्वारा प्रस्तुत अश्वारोहण योग प्रदर्शन रहा, जिसने समारोह को विशिष्ट पहचान प्रदान की। प्रशिक्षित अश्वारोही कैडेटों ने गतिशील एवं नियंत्रित गति से संचालित घोड़ों पर सवार होकर विविध योगासन, संतुलन, एकाग्रता एवं साहसिक कौशल का अद्वितीय प्रदर्शन किया। योग और अश्वकला के इस दुर्लभ संगम ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रदर्शन के दौरान कैडेटों ने जिस साहस, अनुशासन, आत्मविष्वास, मानसिक एकाग्रता एवं शारीरिक नियंत्रण का परिचय दिया, वह युवाओं की क्षमता, नेतृत्व कौशल और उत्कृष्ट प्रशिक्षण का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा। अनेक अवसरों पर घोड़ों की गतिशीलता के बीच प्रस्तुत योगासनों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। उपस्थित लोगों की निगाहें पूरे समय अश्वारोहियों पर टिकी रहीं और उनके अद्भुत संतुलन एवं दक्षता ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। प्रदर्शन की समाप्ति पर पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अश्वारोहण योग की इस विशेष प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि योग केवल साधना का विषय नहीं, बल्कि साहस, संतुलन, आत्मनियंत्रण, नेतृत्व एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन का भी आधार है। योग और शौर्य के इस अद्भुत संगम ने भारतीय युवा शक्ति, अनुशासन एवं राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की भूमिका को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया।
योग विशेषज्ञ कु. राजेश्वरी पोखरिया ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं अन्य योग क्रियाओं का प्रदर्शन कर प्रतिभागियों को अभ्यास कराया। कार्यक्रम का संचालन श्री के.पी. सिंह ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने सामूहिक रूप से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा योग को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुशासन और आत्मविश्वास के मूल्यों को भी सशक्त रूप से स्थापित किया। योग और शौर्य के इस अनूठे संगम ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को विश्वविद्यालय के इतिहास में एक यादगार आयोजन बना दिया।
योग कार्यक्रम के सफल आयोजन में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. विपिन चन्द्र ध्यानी, प्रभारी शारीरिक शिक्षा डा. जी.एस. बोहरा, सह निदेशक शारीरिक शिक्षा डा. पूनम त्यागी, डा. भास्कर तिवारी तथा डा. एच.एस. पपोला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। छात्र कल्याण विभाग एवं शारीरिक शिक्षा अनुभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।

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