महिला किसान दिवस पर दो महिला उद्यमी सम्मानित, प्राकृतिक खेती एवं स्वरोजगार के लिए किया प्रेरित

पंतनगर।(राजतंत्र टाइम्स)। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना-कृषिरत महिलाएं द्वारा जवाहरनगर में महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य महिला किसानों के योगदान को पहचानना, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना तथा उन्हें प्राकृतिक खेती, तकनीकी नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना था।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव डा. दीपा विनय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।कार्यक्रम का शुभारंभ परियोजना की इकाई समन्वयक डा. मनीषा गहलौत ने किया। उन्होंने प्रतिभागी महिलाओं को महिला किसान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती विषय पर आयोजित अतिथि व्याख्यान में प्रोफेसर डा. सुनीता टी. पांडे ने प्राकृतिक खेती के महत्व, मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कृषि को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए प्राकृतिक खेती की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।महिला किसानों के कार्यभार को कम करने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से डा. सीमा क्वात्रा ने श्रम-बचत उपकरणों का प्रदर्शन किया। उन्होंने कृषि एवं घरेलू कार्यों में उपयोगी इन उपकरणों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता समझाते हुए बताया कि इनके प्रयोग से समय और शारीरिक श्रम की बचत की जा सकती है।
कार्यक्रम में स्वरोजगार एवं आय सृजन की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। डा. अनिल कुमार ने जैविक खाद्य उत्पादों तथा खाद्य प्रसंस्करण के महत्व की जानकारी देते हुए चिप्स जैसे उत्पादों के लघु स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय कृषि उपज से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार कर महिलाएं अतिरिक्त आय अर्जित करने के साथ अपने क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर भी विकसित कर सकती हैं।
इस अवसर पर कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिला उद्यमियों श्रीमती राधा पांडे और श्रीमती बबली कोरंगा को सम्मानित किया गया। वैज्ञानिकों ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य महिला किसानों को भी अपने कौशल का विकास करने, स्थानीय संसाधनों का उपयोग करने तथा छोटे स्तर पर उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के आयोजन में इकाई समन्वयक डा. मनीषा गहलौत, डा. दीपा विनय, डा. सीमा क्वात्रा, डा. अनिल कुमार तथा शोध टीम की डा. बीनू सिंह, डा. कल्पलता पंत, डा. संज्ञा सिंह एवं पूजा साह का योगदान रहा।