पंतनगर विश्वविद्यालय ने शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल,पाँच-दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के माध्यम से एआई-सक्षम शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की शुरुआत

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पंतनगर।(राजतंत्र टाइम्स)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – एआई) उच्च शिक्षा के स्वरूप को तेजी से बदल रही है। शिक्षण, अनुसंधान, शैक्षणिक प्रशासन और ज्ञान सृजन की प्रक्रियाएँ अब एआई आधारित तकनीकों से अधिक प्रभावी और दक्ष बन रही हैं। ऐसे समय में शिक्षकों को इन उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग हेतु सक्षम बनाना विश्वभर के विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता बन चुका है।


इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के संकाय विकास केन्द्र (फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर) ने विश्वविद्यालय का पहला संरचित पाँच-दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम ‘शिक्षकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ताः आधारभूत ज्ञान से व्यावहारिक उपयोग तक‘ प्रारम्भ किया है। 13 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय में एआई-सक्षम शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दीर्घकालिक पहल का प्रारम्भिक चरण है।
इस प्रथम बैच में विश्वविद्यालय के 40 से अधिक विभागों के 50 संकाय सदस्य भाग ले रहे हैं। इनमें विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, वरिष्ठ प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर तथा असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं। विविध विषयों के विशेषज्ञों की यह सहभागिता विश्वविद्यालय के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसके अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल तकनीकी विषयों तक सीमित न रखकर शिक्षण, अनुसंधान, प्रसार शिक्षा तथा प्रशासन के प्रत्येक क्षेत्र में समाहित किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को लार्ज लैंग्वेज मॉडल, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, उत्तरदायी एआई, डेटा गोपनीयता, एआई-सहायित शिक्षण, अनुसंधान में एआई के अनुप्रयोग तथा एजेंटिक एआई जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से यह भी प्रदर्शित किया जा रहा है कि एआई किस प्रकार शिक्षण, शोध, शैक्षणिक सामग्री निर्माण तथा दैनिक प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बना सकता है।
यह पहल विश्वविद्यालय के संकाय विकास केन्द्र, जिसे विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट द्वारा अनुमोदित किया गया है, के माध्यम से कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित की जा रही है। कार्यक्रम का समन्वयन डा. जे.पी. पुरवार, सह-समन्वयक, संकाय विकास केन्द्र द्वारा, अनुसंधान निदेशालय एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के सहयोग से किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम की एक विशेषता उद्योग-जगत और विश्वविद्यालय के बीच सशक्त सहयोग है। लूमिक के सह-संस्थापक एवं मुख्य उत्पाद अधिकारी तथा पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र श्री वैभव डोबरियाल इस कार्यक्रम का मार्गदर्शन कर रहे हैं तथा तकनीकी सत्रों का संचालन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक ब्रेन 3.0 (बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक्स, इन्नोवेशन एण्ड नेटवर्किंग) सम्मेलन के दौरान उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय में एआई-सक्षम शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने हेतु सहयोग का संकल्प लिया था। यह कार्यक्रम उसी प्रतिबद्धता का पहला ठोस परिणाम है, जिसके माध्यम से उद्योग जगत का व्यावहारिक अनुभव सीधे विश्वविद्यालय के शिक्षकों तक पहुँच रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि तीव्र गति से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों के इस युग में शिक्षकों और विद्यार्थियों का निरंतर कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षण, अनुसंधान तथा प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है, बशर्ते इसका उपयोग जिम्मेदारी, नैतिकता और विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए।
यह कार्यक्रम पंतनगर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की एआई क्षमता विकसित करने का पहला संगठित संस्थागत प्रयास है और विश्वविद्यालय की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके अंतर्गत शिक्षण, अनुसंधान, प्रसार, नवाचार और प्रशासन के प्रत्येक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभावी समावेश किया जाएगा। शिक्षकों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार कर विश्वविद्यालय न केवल विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को समृद्ध बनाना चाहता है, बल्कि कृषि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक-आधारित नवाचार का अग्रणी संस्थान बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
विश्वभर के विश्वविद्यालय जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में उच्च शिक्षा की नई परिकल्पना कर रहे हैं, वहीं पंतनगर विश्वविद्यालय की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल परिवर्तन की वास्तविक शुरुआत शिक्षकों को सशक्त बनाने से होती है। आज संकाय क्षमता में किया गया यह निवेश भविष्य के अधिक नवाचारी, सहयोगात्मक और तकनीक-सक्षम शैक्षणिक वातावरण की मजबूत नींव तैयार करेगा।

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