विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने पर जोर

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  • राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कुलपतियों के साथ की समीक्षा बैठक
  • युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार और कौशल विकास से जोड़ने के निर्देश
  • विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर बल
  • रोजगारोन्मुख शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील

नैनीताल । (राजतंत्र टाइम्स) राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने मंगलवार को लोक भवन में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट के साथ अलग-अलग बैठक कर विश्वविद्यालयों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों, शोध, नवाचार और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान कुलपतियों ने राज्यपाल को विश्वविद्यालयों में संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों, शोध कार्यों, कौशल विकास आधारित गतिविधियों, नवाचार तथा विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

राज्यपाल ने उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, स्टार्टअप, उद्यमिता, नवाचार और कौशल विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजक भी बन सकें।

राज्यपाल ने युवाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करने तथा विश्वविद्यालयों को समाज से जोड़ने के लिए सामुदायिक सहभागिता आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का समग्र व्यक्तित्व और कौशल विकास सुनिश्चित करना होना चाहिए।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक रिक्त पदों की स्थिति की जानकारी लेते हुए भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में उपलब्ध अवस्थापना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) सुविधाओं की जानकारी लेते हुए उनके सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बुनियादी व्यवस्थाओं का सुदृढ़ होना आवश्यक है।

 

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