“मैं तो अज्ञानी वानर ठहरा प्रभु… आपने अपने अनादि भक्त हनुमान को पहचानने में इतनी देर क्यों कर दी!” राम–हनुमान महामिलन ने दर्शकों को किया भावविभोर

रुद्रपुर। (राजतंत्र टाइम्स) नगर की प्राचीन मुख्य बस स्टैंड वाली रामलीला में राम–हनुमान महामिलन, राम–सुग्रीव मित्रता, सुग्रीव–बाली युद्ध, बाली वध और माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी को दायित्व सौंपने तक की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। भक्त और भगवान के मिलन से लेकर धर्म, न्याय और मर्यादा के संदेश तक, प्रत्येक प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। राम–हनुमान संवाद के दौरान भक्ति और समर्पण से जुड़े दृश्यों ने विशेष रूप से दर्शकों का मन मोह लिया।आज की लीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि किच्छा विधायक एवं श्रीरामलीला कमेटी के संरक्षक तिलक राज बेहड़ तथा उनकी धर्मपत्नी बीना बेहड़ ने प्रभु श्रीराम दरबार के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी की ओर से अतिथियों का माल्यार्पण एवं शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

“मैं तो अज्ञानी वानर ठहरा प्रभु… आपने अपने अनादि भक्त हनुमान को पहचानने में इतनी देर क्यों कर दी!” राम–हनुमान महामिलन ने दर्शकों को किया भावविभोर

राम–हनुमान महामिलन ने बांधा समां, भक्ति के संवादों पर गूंज उठीं तालियां

संध्या की लीला का सबसे भावुक प्रसंग राम–हनुमान महामिलन रहा। माता सीता की खोज में वन में विचरण कर रहे प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के समक्ष हनुमान जी ब्राह्मण वेश में पहुंचे। परिचय पूछने के दौरान उनकी विनम्र वाणी और व्यवहार ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रभु श्रीराम का परिचय मिलते ही हनुमान जी ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और भावविह्वल होकर उनके चरणों में नतमस्तक हो गए।प्रभु श्रीराम ने भी अपने अनन्य भक्त हनुमान को उठाकर हृदय से लगा लिया। इस दृश्य ने पूरे रामलीला परिसर को भक्तिमय बना दिया। हनुमान की भूमिका निभा रहे सुशील गाबा ने अपने प्रभावशाली अभिनय से विनम्रता, समर्पण और प्रभु के प्रति अटूट प्रेम को जीवंत कर दिया।राम–हनुमान संवादों के बीच भक्ति की गहराई और भक्त के प्रति भगवान के स्नेह ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इस प्रसंग ने सेवा, विश्वास और समर्पण का संदेश दिया।

“मैं तो अज्ञानी वानर ठहरा प्रभु… आपने अपने अनादि भक्त हनुमान को पहचानने में इतनी देर क्यों कर दी!” राम–हनुमान महामिलन ने दर्शकों को किया भावविभोर

राम–सुग्रीव मित्रता के बाद सुग्रीव–बाली युद्ध का रोमांचक मंचन

इसके बाद हनुमान जी प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर बैठाकर ऋष्यमूक पर्वत ले गए, जहां उनकी भेंट सुग्रीव से हुई। सुग्रीव ने अपने बड़े भाई बाली द्वारा किए गए अन्याय और अपने कष्टों की व्यथा प्रभु श्रीराम को सुनाई। श्रीराम ने सुग्रीव को सहायता का आश्वासन दिया। अग्नि को साक्षी मानकर दोनों के बीच मित्रता हुई और एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प लिया गया।अगले दृश्य में सुग्रीव ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों भाइयों के बीच हुए युद्ध का मंचन रोमांचक रहा। पहले मुकाबले में दोनों की समान आकृति के कारण प्रभु श्रीराम बाण नहीं चला सके। इसके बाद सुग्रीव को पहचान के लिए माला पहनाकर दोबारा युद्ध के लिए भेजा गया। युद्ध के दौरान श्रीराम के बाण से बाली धराशायी हो गया।बाली और प्रभु श्रीराम के बीच हुए संवादों में धर्म, न्याय और मर्यादा के प्रश्नों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। बाली के अंतिम क्षणों तथा अंगद के विलाप के मार्मिक दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक हुआ।

हनुमान जी को सौंपी माता सीता की खोज की जिम्मेदारी

लीला के अंतिम प्रसंग में माता सीता की खोज का दायित्व हनुमान जी को सौंपा गया। प्रभु श्रीराम ने उन्हें अपनी मुद्रिका प्रदान की। यह दृश्य आगामी लंका यात्रा और हनुमान जी के पराक्रम की झलक देते हुए दर्शकों में अगले दिन की लीला के प्रति उत्सुकता बढ़ा गया।

कलाकारों ने शानदार अभिनय से जीता दर्शकों का दिल

राम की भूमिका में मनोज अरोरा, हनुमान की भूमिका में सुशील गाबा, लक्ष्मण की भूमिका में गौरव जग्गा, गणेश भगवान की भूमिका में आशीष ग्रोवर, सुग्रीव की भूमिका में मोहन अरोरा, बाली की भूमिका में वैभव भुड्डी, अंगद की भूमिका में युविक गंभीर, तारा की भूमिका में सुमित आनंद तथा जामवंत की भूमिका में रोहित खुराना ने शानदार अभिनय किया। हनुमान के सेनापति की भूमिका में आयुष्मान सुशील गाबा ने भी प्रभाव छोड़ा। वहीं जोकर पार्टी में राम कृष्ण कन्नौजिया, मनोज मुंजाल, गोगी नरूला और रजत अरोरा ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। कलाकारों के अभिनय पर उपस्थित हजारों दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का संचालन मंच सचिव संदीप धीर और विजय जग्गा ने किया।

इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के संरक्षक तिलक राज बेहड़, अध्यक्ष मनोज गाबा, समन्वयक राजेश छाबड़ा, नरेश शर्मा, बीना बेहड़, पूर्वा बेहड़, सुभाष खडेलवाल, दिनेश खडेलवाल, बिट्टू ग्रोवर, वरिष्ठ पत्रकार भानु चुघ, अंकुर चुघ, रवि, सौरभ गंगवार, सुरेन्द्र शर्मा, हरीश अरोरा, विजय जग्गा, अमित चावला, महावीर आजाद, राकेश सुखीजा, कर्मचन्द राजदेव, अमित अरोरा बोबी, प्रेम खुराना, संजीव आनंद, गौरव तनेजा, हरीश सुखीजा, मनोज मुंजाल, विशाल भुडी, अनिल तनेजा, रमन अरोरा, गौरव राज बेहड़, सौरम राज बेहड़, राजकुमार कक्कड़, सचिन मुंजाल, चिराग तनेजा, रवि अरोरा, चिराग कालड़ा, रोहित जग्गा, सचिन तनेजा, गौरव जग्गा, सचिन आनंद, सुमित आनंद, सन्नी आहूजा, कपिश सुखीजा, लवी ग्रोवर, नोनी ग्रोवर, नीतिश धीर, रान्नी सुखीजा और जतिन सुखीजा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

“मैं तो अज्ञानी वानर ठहरा प्रभु… आपने अपने अनादि भक्त हनुमान को पहचानने में इतनी देर क्यों कर दी!” राम–हनुमान महामिलन ने दर्शकों को किया भावविभोर

बॉक्स: आज होगा लंका दहन, हनुमान जी के पराक्रम का होगा मंचन

 मुख्य बस स्टैंड स्थित प्राचीन श्रीरामलीला में आज हनुमान जी के लंका पहुंचने से लेकर लंका दहन तक की रोमांचक लीला का मंचन किया जाएगा। कार्यक्रम में समुद्र तट पर हनुमान–संपाती संवाद, जामवंत एवं वानर दल द्वारा हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराना, हनुमान जी का लंका पहुंचना, रावण–सीता संवाद, हनुमान–सीता संवाद, अशोक वाटिका उजाड़ना, अक्षय कुमार वध, हनुमान–मेघनाद संवाद, मेघनाद द्वारा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर हनुमान जी को बंदी बनाना, हनुमान–रावण संवाद, लंका दहन तथा हनुमान जी की राम शिविर में वापसी जैसे प्रमुख दृश्य प्रस्तुत किए जाएंगे। लंका दहन की लीला को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहने की उम्मीद है।